Department of Hindi:
लाला जगत नारायण हिमोतकर्ष कन्या महाविद्यालय, कोटला खुर्द का हिंदी विभाग, इस शैक्षणिक संस्थान का एक महत्वपूर्ण अंग है जो हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन, अध्यापन के लिए समर्पित है। यह विभाग छात्राओं को हिंदी भाषा में प्रवीणता प्राप्त करने, साहित्य के विभिन्न पहलुओं को समझने, और हिंदी साहित्य के इतिहास, आलोचना और भाषा-विज्ञान का अध्ययन करने में मदद करता है।
हिंदी विभाग का मुख्य उद्देश्य
छात्राओं को हिंदी भाषा और साहित्य का ज्ञान प्रदान करना, उन्हें हिंदी साहित्य के विभिन्न रूपों (जैसे कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास, आदि) से परिचित करवाना, और उन्हें हिंदी भाषा में प्रभावी ढंग से संवाद करने में सक्षम बनाना है।
साहित्य, भाषा, मीडिया, रंगमंच, सिनेमा और अनुवाद, हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य से जुड़े प्रश्नपत्रों का अध्ययन-अध्यापन किया जाता है।हिन्दी विभाग पाठ्यक्रम प्रशिक्षण के अलावा छात्राओं के बौद्धिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए सतत प्रतिबद्ध है।
हिंदी विभाग विद्यार्थियों में हिंदी साहित्य के प्रति सुदृढ़ अवधारणा का निर्माण करने, हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उनकी रचनात्मकता को सामने लाने और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा की विविधता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सदैव प्रयासरत रहता है।
हिन्दी विभाग की तरफ से प्रत्येक वर्ष हिन्दी दिवस का आयोजन किया जाता है। जिसके अंतर्गत रचना पाठ एवं विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
Department of Hindi:
Dr. Reena Chandel
(M.A, B.Ed,M.Phil,Ph.D)
Click here to download the syllabus
Click here to download the Time Table foe the session 2025-26…
Previous Year Question Papers….
हिंदी दिवस:







लक्ष्य
उपरोक्त पाठ्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए जो हिंदी साहित्य स्नातक स्तर पर नहीं पढ़ते के लिए निर्धारित किया गया हैं। पाठ्यक्रम में चार विचारधाराओं और चिंतकों के सिद्धान्तों के बारे में विद्यार्थी अपनी समझ विकसित कर सके और इन विचारधाराओं ने भारतीय साहित्य को किस प्रकार प्रभावित किया है यह जान सके और स्वयं पढ़कर अपना एक दृष्टिकोण विकसित कर सकें- यह पाठ्यक्रम का लक्ष्य है।
विद्यार्थियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपनी एलाइन्मेंट्स इस प्रकार चुने कि उनके आधार पर वे मौलिक हो सकें पाठ्यक्रम के ‘लेख लिखने की ओर प्रवृत सत्र के दौरान विद्यार्थियों को सभी विचारधारा के तुलनात्मक अध्ययन के बाद अपनी दृष्टि में क्या बदलाव हुआ, से सम्बन्धित लेख मांगे गए।
कुल्लवी संस्कार उपन्यास के आधार समाज व परिवेश में जो परम्पराएं या कट थोडे समाज को निर्धारित कर रही है उन पर आधारित परियोजनार दी गई। टैगोर की गीतांजलि के आधार पर भारतीय संस्कृति, अध्यात्मवाद व विश्वबन्धुत्त / अन्तर्राष्ट्रीयतावाद पर परियोजनाएं दी गई। (विभागीय फाइल मे चूँकलित) विजय तेन्दुलकर के घावीराम कोतवाल नाटक को हिमपट प्रदेश विश्वविद्यालय की प्रतियोगिता हेतु तैयार करवाया गया जिसका गंपन विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत करके विद्यार्थियों व स्टान को दिखाया गया। सभी विचारको के आप्त वाक्यों के पोस्टर ( दोनों को में प्रदर्शित) मौलिक लेखों के लिए विद्यार्थियों ने जहां एक ओर अपने अपने गावी मुहल्लों परिवारों के विभिन्न लोगों से सम्पर्क करके अपनी स्वयं की दृष्टि विकसित की वही पाठ्यक्रम को समुदाय के साथ जोड़कर जानने व सीखने का अवसर भी हासिल किया।
Download Program outcome/Course Outcome
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लाला जगत नारायण हिमोतकर्ष कन्या महाविद्यालय, कोटला खुर्द का हिंदी विभाग, इस शैक्षणिक संस्थान का एक महत्वपूर्ण अंग है जो हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन, अध्यापन के लिए समर्पित है। यह विभाग छात्राओं को हिंदी भाषा में प्रवीणता प्राप्त करने, साहित्य के विभिन्न पहलुओं को समझने, और हिंदी साहित्य के इतिहास, आलोचना और भाषा-विज्ञान का अध्ययन करने में मदद करता है।
हिंदी विभाग का मुख्य उद्देश्य
छात्राओं को हिंदी भाषा और साहित्य का ज्ञान प्रदान करना, उन्हें हिंदी साहित्य के विभिन्न रूपों (जैसे कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास, आदि) से परिचित करवाना, और उन्हें हिंदी भाषा में प्रभावी ढंग से संवाद करने में सक्षम बनाना है।
साहित्य, भाषा, मीडिया, रंगमंच, सिनेमा और अनुवाद, हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य से जुड़े प्रश्नपत्रों का अध्ययन-अध्यापन किया जाता है।हिन्दी विभाग पाठ्यक्रम प्रशिक्षण के अलावा छात्राओं के बौद्धिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए सतत प्रतिबद्ध है।
हिंदी विभाग विद्यार्थियों में हिंदी साहित्य के प्रति सुदृढ़ अवधारणा का निर्माण करने, हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उनकी रचनात्मकता को सामने लाने और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा की विविधता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सदैव प्रयासरत रहता है।
हिन्दी विभाग की तरफ से प्रत्येक वर्ष हिन्दी दिवस का आयोजन किया जाता है। जिसके अंतर्गत रचना पाठ एवं विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
Department of Hindi:
Dr. Reena Chandel
(M.A, B.Ed,M.Phil,Ph.D)
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Previous Year Question Papers….
हिंदी दिवस:







लक्ष्य
उपरोक्त पाठ्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए जो हिंदी साहित्य स्नातक स्तर पर नहीं पढ़ते के लिए निर्धारित किया गया हैं। पाठ्यक्रम में चार विचारधाराओं और चिंतकों के सिद्धान्तों के बारे में विद्यार्थी अपनी समझ विकसित कर सके और इन विचारधाराओं ने भारतीय साहित्य को किस प्रकार प्रभावित किया है यह जान सके और स्वयं पढ़कर अपना एक दृष्टिकोण विकसित कर सकें- यह पाठ्यक्रम का लक्ष्य है।
विद्यार्थियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपनी एलाइन्मेंट्स इस प्रकार चुने कि उनके आधार पर वे मौलिक हो सकें पाठ्यक्रम के ‘लेख लिखने की ओर प्रवृत सत्र के दौरान विद्यार्थियों को सभी विचारधारा के तुलनात्मक अध्ययन के बाद अपनी दृष्टि में क्या बदलाव हुआ, से सम्बन्धित लेख मांगे गए।
कुल्लवी संस्कार उपन्यास के आधार समाज व परिवेश में जो परम्पराएं या कट थोडे समाज को निर्धारित कर रही है उन पर आधारित परियोजनार दी गई। टैगोर की गीतांजलि के आधार पर भारतीय संस्कृति, अध्यात्मवाद व विश्वबन्धुत्त / अन्तर्राष्ट्रीयतावाद पर परियोजनाएं दी गई। (विभागीय फाइल मे चूँकलित) विजय तेन्दुलकर के घावीराम कोतवाल नाटक को हिमपट प्रदेश विश्वविद्यालय की प्रतियोगिता हेतु तैयार करवाया गया जिसका गंपन विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत करके विद्यार्थियों व स्टान को दिखाया गया। सभी विचारको के आप्त वाक्यों के पोस्टर ( दोनों को में प्रदर्शित) मौलिक लेखों के लिए विद्यार्थियों ने जहां एक ओर अपने अपने गावी मुहल्लों परिवारों के विभिन्न लोगों से सम्पर्क करके अपनी स्वयं की दृष्टि विकसित की वही पाठ्यक्रम को समुदाय के साथ जोड़कर जानने व सीखने का अवसर भी हासिल किया।